हमारे शरीर में सेहत का बड़ा हिस्सा जेनेटिक्स से तय होता है। खासकर मां से मिलने वाली कुछ चीजें हमारी एनर्जी से लेकर दिमाग तक पर असर डालती हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि माइटोकॉन्ड्रिया नाम की चीज सिर्फ मां से ही मिलती है। यही हमारे शरीर की हर कोशिका को ताकत देती है।
इसे ही Genetic Traits from Mother कहा जाता है। इसका मतलब सिर्फ आंखों का रंग नहीं, बल्कि अंदरूनी सेहत की बातें हैं।
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विज्ञान क्या कहता है? सिर्फ मां से ही क्यों?
जेनेटिक्स के जानकार बताते हैं कि पिता के स्पर्म में माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए नहीं होता। इसलिए ये सिर्फ मां से बच्चे तक जाता है।
अमेरिका के NIH की रिसर्च में भी माना गया है कि दिमाग की उम्र और एनर्जी पर मां की जेनेटिक्स का असर पड़ता है।
एक और बात, लड़कों को X क्रोमोसोम सिर्फ मां से मिलता है। इसलिए कई लक्षण मां की तरफ से ज्यादा आते हैं।
1. दिनभर की थकान और एनर्जी
हर कोशिका में माइटोकॉन्ड्रिया पावर हाउस की तरह काम करता है। इसका पूरा डीएनए मां से आता है।
अगर ये थोड़ा कमजोर हो तो जल्दी थकान लगना और कसरत के बाद देर तक थकान रहना आम है।
क्या करें: रोज टहलना, हरी सब्जियां खाना और भरपूर पानी पीना मदद करता है।
2. दिमाग और याददाश्त पर असर
कुछ स्टडी में देखा गया है कि अल्जाइमर जैसी बीमारी का खतरा मां की फैमिली हिस्ट्री से ज्यादा जुड़ा होता है।
इसका मतलब ये नहीं कि बीमारी होगी ही। पर सतर्क रहना जरूरी है।
क्या करें: रोज पजल हल करना, किताब पढ़ना और अच्छी नींद लेना।
3. नर्वस सिस्टम से जुड़ी बातें
मां हर बच्चे को एक X क्रोमोसोम देती है। इस पर दिमाग और नसों से जुड़े कई जीन होते हैं।
कलर देखना, ध्यान लगाना जैसी छोटी बातें भी इसी से तय होती हैं।
4. तनाव सहने की ताकत
तनाव बढ़ाने वाला हार्मोन कोर्टिसोल कैसे काम करेगा, ये भी मां की जेनेटिक्स से जुड़ा है।
कुछ लोगों को ज्यादा घबराहट होती है, कुछ जल्दी शांत हो जाते हैं। ये पैटर्न मां से आ सकता है।
क्या करें: रोज 10 मिनट योग और ध्यान।
5. शुगर और वजन का कनेक्शन
इंसुलिन और शरीर में चर्बी जमा करने वाले कुछ जीन मां की तरफ से मजबूत आते हैं।
टाइप-2 डायबिटीज का खतरा अक्सर ननिहाल पक्ष में ज्यादा देखा गया है।
क्या करें: मीठा कम, संतुलित खाना और वजन कंट्रोल में रखना।
6. इम्यून सिस्टम यानी रोगों से लड़ने की ताकत
शरीर में सूजन को कंट्रोल करने वाले जीन भी मां से प्रभावित होते हैं।
बार-बार एलर्जी होना या जल्दी बीमार पड़ना, इसका एक कारण जेनेटिक्स भी हो सकता है।
7. एपिजेनेटिक्स – जीन का स्विच
जीन के अलावा कुछ स्विच भी होते हैं जो जीन को चालू-बंद करते हैं। ये स्विच गर्भ में ही सेट हो जाते हैं।
इसलिए मां की सेहत गर्भावस्था में बहुत मायने रखती है।
इन बातों को जानकर सेहत कैसे ठीक रखें?
जेनेटिक्स को हम बदल नहीं सकते, पर संभाल सकते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर परिवार में कोई बीमारी रही है तो समय पर जांच करा लें। सबसे बड़ा बचाव है अच्छी लाइफस्टाइल।
- रोज 30 मिनट पैदल चलना
- हरी सब्जी और फल खाना
- तनाव कम लेना
- समय पर सोना और उठना
याद रखें, जेनेटिक्स किस्मत नहीं है। ये सिर्फ एक नक्शा है। सही आदतों से आप खुद को स्वस्थ रख सकते हैं।
नोट: ये लेख सिर्फ जानकारी के लिए है। कोई भी फैसला लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: क्या सारी सेहत मां से ही मिलती है?
जवाब: नहीं। ज्यादातर चीजें मां और पिता दोनों से मिलती हैं। पर माइटोकॉन्ड्रिया सिर्फ मां से आता है।
सवाल: क्या मां से अल्जाइमर का खतरा हमेशा बढ़ता है?
जवाब: नहीं। सिर्फ खतरा थोड़ा ज्यादा हो सकता है। अच्छी आदतों से इसे कम किया जा सकता है।
सवाल: माइटोकॉन्ड्रिया कमजोर हो तो क्या करें?
जवाब: अच्छी डाइट लें, रोज कसरत करें और डॉक्टर से बात करें।
सवाल: क्या जेनेटिक्स बदली जा सकती है?
जवाब: जीन नहीं बदलते, पर खानपान और आदतों से उनका असर कम-ज्यादा किया जा सकता है।

