विश्व हृदय दिवस 2026 के अवसर पर, दुनिया भर से हृदय रोगों से जुड़ी जो खबरें सामने आ रही हैं, वे हमें याद दिलाती हैं कि अपने दिल का ख्याल रखना कितना ज़रूरी है। भारत, दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश जैसी जगहों पर हृदय रोगों का बढ़ता खतरा चिंता का विषय है। इस साल विश्व हृदय दिवस की थीम ‘Don’t Miss a Beat’ है, जिसका मतलब है कि हमें हृदय संबंधी चेतावनी के संकेतों को कभी भी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन भी यही कोशिश कर रहा है कि लोग इन संकेतों को जल्दी पहचानें और जो चीज़ें हृदय रोग का खतरा बढ़ाती हैं, उन पर काबू पाएं।
भारत में हृदय रोगों का बढ़ता खतरा
भारत में स्थिति काफी गंभीर है। हमारे पास जो जानकारी है, उसके मुताबिक भारत में होने वाली हर तीन मौतों में से एक, यानी लगभग 33% मौतें सीधे तौर पर हृदय रोगों की वजह से होती हैं। यह एक बहुत बड़ी संख्या है। इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि भारतीयों को विकसित देशों के लोगों की तुलना में लगभग 10 साल पहले ही दिल का दौरा पड़ रहा है। यह दर्शाता है कि हमारे देश में हृदय रोग कम उम्र से ही लोगों को अपनी चपेट में ले रहे हैं।
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बिना लक्षण भी बढ़ सकता है हृदय रोग का खतरा
यह समझना बहुत ज़रूरी है कि कई बार हृदय रोग बिना किसी साफ लक्षण के भी बढ़ सकते हैं। हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं अक्सर तब तक पता नहीं चलतीं जब तक कि दिल का कोई बड़ा मामला न हो जाए। सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉक्टर रॉबर्ट ग्रांट कहते हैं कि महिलाओं, युवाओं और समाज के कमजोर तबकों में हृदय रोगों के खतरों को पहचानने में कमी आना, रोकथाम के रास्ते में एक बड़ी रुकावट है। हमें इन खास समूहों पर ज्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है।
इन 5 स्वास्थ्य आंकड़ों पर रखें नजर

डॉक्टर हमें कुछ ऐसी बातों पर नज़र रखने की सलाह देते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत मायने रखती हैं:
हमारा ब्लड प्रेशर कैसा है?
हमारे शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर क्या है?
ब्लड शुगर की रीडिंग क्या बताती है?
हमारा वज़न कितना है और क्या यह सामान्य सीमा में है?
क्या हमारे परिवार में किसी को हृदय रोग रहा है?
हाई ब्लड प्रेशर को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन भी इस बात पर ज़ोर देता है कि हाई ब्लड प्रेशर अक्सर तब तक कोई लक्षण नहीं दिखाता जब तक कि दिल का दौरा या स्ट्रोक जैसी गंभीर घटना न हो जाए। इसलिए, नियमित जांच करवाना बहुत ज़रूरी है।
दक्षिण अफ्रीका में भी हृदय रोग बड़ी चुनौती
दक्षिण अफ्रीका की हालत भी कुछ अलग नहीं है। वहां हर छह में से एक मौत हृदय और मस्तिष्क संबंधी बीमारियों की वजह से होती है। हर दिन लगभग 225 लोगों की मौत दिल की बीमारी या स्ट्रोक से हो जाती है। वहां तीन में से एक से ज़्यादा वयस्क लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है।
लक्षण आने से पहले पहचान जरूरी
डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म Unu Health के लांस ब्लूमरिस बताते हैं कि कई जोखिम ऐसे होते हैं जो लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के हमारे शरीर में बने रहते हैं। लोग अक्सर तब डॉक्टर के पास जाते हैं जब समस्या बहुत बढ़ चुकी होती है और लक्षण साफ दिखने लगते हैं।
बांग्लादेश में Labaid अस्पताल की खास पहल
बांग्लादेश में Labaid अस्पताल ने इस बार विश्व हृदय दिवस पर एक खास पहल की है। ‘Don’t Miss a Beat’ थीम के तहत, उन्होंने लोगों के लिए मुफ्त कार्डियक कंसल्टेशन का कार्यक्रम चलाया। अस्पताल में हृदय रोगों और उनसे बचाव के तरीकों पर एक सेमिनार भी आयोजित किया गया, जिसमें कई बड़े डॉक्टरों ने हिस्सा लिया और अपनी राय दी।
25 सितंबर से 15 अक्टूबर तक विशेष कार्डियक स्क्रीनिंग
इसके अलावा, अस्पताल ने लोगों को अपने दिल के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देने के लिए 25 सितंबर से 15 अक्टूबर 2026 तक एक विशेष कार्डियक स्क्रीनिंग पैकेज भी शुरू किया है। इसका मकसद लोगों को अपने दिल की सेहत की जांच कराने और ज़रूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। लोगों को जागरूक करने के लिए एक जागरूकता रैली भी निकाली गई, जो शहर के मुख्य रास्तों से गुज़रते हुए अस्पताल परिसर में आकर खत्म हुई।
समय पर जांच करवाना क्यों जरूरी है?
तो, समय पर जांच करवाना इतना ज़रूरी क्यों है? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दिल का दौरा एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना और तुरंत आपातकालीन देखभाल तक पहुँचना जान बचाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अच्छी बात यह है कि हाई ब्लड प्रेशर, गलत खान-पान, व्यायाम न करना, तंबाकू का सेवन, ज़्यादा वज़न, बढ़ा हुआ ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे कई जोखिम कारकों को नियंत्रित किया जा सकता है।
भारत में हृदय रोगों का आंकड़ा क्या कहता है?
वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के भारत के लिए दिए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में हृदय रोगों का बोझ बहुत ज़्यादा है। 2024 के उनके प्रोफाइल में भारत में हृदय रोगों से 3,165,172 मौतों का उल्लेख है, और 2021 में कुल मौतों में हृदय रोगों की हिस्सेदारी 24.5% थी। यह आंकड़ा आपके पास मौजूद 33% के आंकड़े से थोड़ा अलग है, इसलिए यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये अलग-अलग स्रोत हो सकते हैं और हमें लेख में इन दोनों को एक ही मानकर नहीं चलना चाहिए।
विश्व हृदय दिवस 2026 का संदेश
कुल मिलाकर, विश्व हृदय दिवस 2026 हमें यही संदेश देता है कि हमें अपने दिल के स्वास्थ्य को सिर्फ तब चिंता का विषय नहीं बनाना चाहिए जब हम बीमार हों। नियमित स्वास्थ्य जांच और उन चीज़ों पर ध्यान देना, जो हृदय रोग का खतरा बढ़ाती हैं, हमारी दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए। ‘Don’t Miss a Beat’ अभियान भी हमें यही याद दिलाता है कि हमें अपने शरीर के संकेतों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर तुरंत डॉक्टरी मदद लेनी चाहिए।
जरूरी स्वास्थ्य सलाह
यह जानकारी केवल सामान्य स्वास्थ्य सलाह के लिए है। अगर किसी को सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या कोई अन्य गंभीर लक्षण महसूस हो, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।