नई दिल्ली, 1 नवंबर 2026: राजधानी दिल्ली का रामलीला मैदान आज फिर देश की राजनीति के केंद्र में है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली आज यहां हो रही है। रामलीला मैदान रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग है। सुबह से ही मैदान और उसके आसपास समर्थकों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जबकि मध्य दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

रैली का कार्यक्रम सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया है। इसके साथ ही दोपहर 12 बजे मिंटो रोड-कनॉट प्लेस चौराहे से अजमेरी गेट होते हुए रामलीला मैदान तक एक मार्च की भी योजना थी। हालांकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि रैली के लिए अनुमति दी गई है, लेकिन प्रस्तावित मार्च के लिए उसे कोई आवेदन नहीं मिला था। इसीलिए मार्च को लेकर सुबह से ही असमंजस की स्थिति बनी रही।
रामलीला मैदान रैली: 5 बड़ी बातें एक नजर में
- कहां और कब: दिल्ली के रामलीला मैदान में, 1 नवंबर को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक।
- कौन: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी सहित INDIA ब्लॉक के कई बड़े नेता।
- मुख्य मांगें: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR प्रक्रिया पर रोक और पेपर बैलट की वापसी।
- विवाद की जड़: विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में करीब 13 करोड़ नाम मसौदा सूची से हटाए गए हैं। चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हैं।
- सुरक्षा: पुलिस करीब 50,000 लोगों की तैयारी में है, जबकि आयोजकों का दावा लाखों की भीड़ का है। दिल्ली में तैनात 270 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की कंपनियों की तैनाती 16 नवंबर तक बढ़ा दी गई है।
रामलीला मैदान रैली की दो बड़ी मांगें क्या हैं
विपक्षी गठबंधन की पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। दूसरी मांग SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की है। विपक्ष का कहना है कि पुनरीक्षण के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए गए हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठता है।
दूसरी तरफ चुनाव आयोग का पक्ष यह है कि मतदाता सूची को अद्यतन करना एक जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया है। आयोग के अनुसार हटाए गए नामों में करीब 2.8 करोड़ मृतक, 6.3 करोड़ स्थानांतरित और 3 करोड़ ऐसे लोग शामिल हैं जिनका पता नहीं चल सका। भाजपा भी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताकर खारिज करती है। यानी दोनों पक्षों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, और यही टकराव आज की रैली की असली वजह है।
सुरक्षा और ट्रैफिक: दिल्ली पुलिस की तैयारी
रैली को देखते हुए रामलीला मैदान के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दंगा-रोधी वाहनों और बैटन-शील्ड से लैस जवानों की तैनाती की गई है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मध्य दिल्ली के कई हिस्सों में डायवर्जन की सलाह दी है। इसलिए आज मध्य दिल्ली से गुजरने वालों को पहले से रूट की जानकारी लेकर चलने की सलाह दी गई है।
मैदान की क्षमता को लेकर भी आंकड़े चर्चा में हैं। खाली मैदान में करीब 45,000 से 50,000 लोग आ सकते हैं, लेकिन मंच, कुर्सियां और रास्ते बनने के बाद यह संख्या घटकर 30,000 से 40,000 रह जाती है। ऐसे में आयोजकों के लाखों की भीड़ के दावे और पुलिस के अनुमान के बीच का अंतर ही आज की सबसे बड़ी चुनौती है।
भाजपा का जवाब और तारीख पर सवाल
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रैली की तारीख पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर दिल्ली के इतिहास में बेहद संवेदनशील दिन है, क्योंकि 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी और अगले दिन दिल्ली में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा हुई थी। भाजपा का कहना है कि विपक्ष ने यह तारीख जानबूझकर चुनी है। विपक्ष इस आरोप को खारिज करता है और रैली को संविधान की रक्षा का आंदोलन बताता है।
राहुल गांधी की अपील: प्रोटेस्ट के साथ खरीदारी भी
रैली से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक खास अपील की थी। उन्होंने लोगों से कहा था कि पुलिस और लाठियों से डरने की जरूरत नहीं है और यह मार्च किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का मार्च है। साथ ही उन्होंने दिल्ली आने वाले लोगों से स्थानीय बाजारों में खरीदारी करने की भी अपील की, ताकि छोटे दुकानदारों को फायदा हो। उनका कहना था कि दिवाली, छठ और भाईदूज के मौके पर बाहर से आने वाले लोग अगर छोटी दुकानों से सामान खरीदेंगे तो व्यापारियों की मदद होगी।
आगे क्या होगा
यह रैली 31 अक्टूबर को खरगे आवास पर प्रस्तावित जन-महाभियोग कार्यक्रम के बाद विपक्ष की अगली बड़ी लामबंदी है। वह कार्यक्रम दिल्ली में बारिश के कारण टल गया था। अब सवाल यह है कि रैली के बाद विपक्ष अपना आंदोलन किस दिशा में ले जाएगा और चुनाव आयोग इस पर क्या रुख अपनाएगा। अगला आम चुनाव 2029 में होना है, इसलिए मतदाता सूची को लेकर यह विवाद लंबा चल सकता है। फिलहाल इतना तय है कि रामलीला मैदान की आज की रैली ने चुनावी प्रक्रिया पर बहस को एक बार फिर देश के सामने ला दिया है।

