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भारतीय वैज्ञानिकों के लिए खुला यूरोप का €93.5 अरब का शोध फंड

भारत-यूरोपीय संघ के होराइजन यूरोप समझौते से भारतीय शोधकर्ताओं को यूरोप के €93.5 अरब के शोध कार्यक्रम में शामिल होने का रास्ता खुलेगा।

होराइजन यूरोप भारत शोध सहयोग

भारत के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए आज, 7 नवंबर को एक बड़ी खुशखबरी आई है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने होराइजन यूरोप भारत समझौते को लेकर बातचीत पूरी कर ली है। इसका मतलब है कि भारतीय शोधकर्ता अब यूरोप के सबसे बड़े शोध और नवाचार कार्यक्रम में शामिल हो सकेंगे — जिसका कुल बजट €93.5 अरब (लगभग ₹9.6 लाख करोड़) है।

होराइजन यूरोप क्या है?

होराइजन यूरोप यूरोपीय संघ का प्रमुख शोध और नवाचार फंडिंग कार्यक्रम है, जो 2021 से 2027 के बीच चल रहा है। इसके तहत यूरोप के विश्वविद्यालय, शोध संस्थान और कंपनियां बड़े वैज्ञानिक प्रोजेक्ट्स के लिए फंड पाते हैं। अब तक भारत इस कार्यक्रम का साझेदार नहीं था — भारतीय संस्थान सिर्फ सीमित तरीकों से इसमें भाग ले सकते थे।

भारतीय वैज्ञानिकों को क्या मिलेगा?

समझौते के बाद भारतीय शोधकर्ता, संस्थान और कंपनियां यूरोप के शोध समूहों (कंसोर्टिया) के साथ मिलकर फंडिंग के लिए आवेदन कर सकेंगे। उन्हें यूरोप की अत्याधुनिक शोध सुविधाओं और प्रयोगशालाओं तक पहुंच भी मिलेगी। आसान शब्दों में — अब कोई भारतीय प्रोफेसर या स्टार्टअप अकेले नहीं, बल्कि यूरोपीय साझेदारों के साथ मिलकर बड़े प्रोजेक्ट के लिए फंड मांग सकेगा।

किन क्षेत्रों में होगा शोध?

कार्यक्रम के ‘पिलर II’ में वे विषय आते हैं जो भारत की प्राथमिकताओं से सीधे जुड़ते हैं:

यानी कैंसर की नई दवा से लेकर स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष मलबे तक — हर बड़े सवाल पर भारत-यूरोप मिलकर काम कर सकेंगे।

होराइजन यूरोप भारत भारतीय शोधकर्ता
भारत यूरोपीय संघ शोध सहयोग होराइजन यूरोप (प्रतीकात्मक फोटो)

कब से शुरू होगा?

यूरोपीय आयोग का अनुमान है कि भारत का एसोसिएशन जनवरी 2027 से शुरू हो सकता है। लेकिन एक बात साफ समझ लें — अभी सिर्फ बातचीत पूरी हुई है। समझौते पर हस्ताक्षर और जरूरी प्रक्रियाएं बाकी हैं, इसलिए तारीख पक्की नहीं है। किसी लैब या संस्थान को कोई प्रस्ताव भेजने से पहले आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना चाहिए।

यह समझौता यहां तक कैसे पहुंचा?

इसकी नींव 27 जनवरी 2026 के ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में पड़ी, जिसके बाद एसोसिएशन की संभावना तलाशी जाने लगी। औपचारिक बातचीत 15 जुलाई 2026 को ब्रसेल्स में हुई भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की मंत्री-स्तरीय बैठक के बाद शुरू हुई। दोनों पक्ष पहले से ही विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते के तहत काम कर रहे थे — होराइजन यूरोप उस साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाता है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह खबर?

भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर चल रहा है, और उसके लिए घरेलू शोध के साथ-साथ वैश्विक साझेदारी भी जरूरी है। यूरोप के साथ यह समझौता भारतीय शोध को दुनिया के सबसे बड़े फंडिंग नेटवर्क से जोड़ता है। युवा शोधकर्ताओं के लिए यह विदेश में काम करने और सीखने का नया रास्ता खोलता है, और भारतीय संस्थानों के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान का मौका देता है।

क्या ध्यान रखें

€93.5 अरब पूरे कार्यक्रम का बजट है, सिर्फ भारत के लिए आवंटित रकम नहीं। अभी किसी भारतीय प्रोजेक्ट को कोई ग्रांट नहीं मिली है — यह सिर्फ रास्ता खुलने की घोषणा है। असली फायदा तब होगा जब भारतीय संस्थान यूरोपीय साझेदारों के साथ मजबूत प्रस्ताव तैयार करेंगे और फंडिंग कॉल जीतेंगे।

लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

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