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कार बाजार गिरा 14.6%, फिर भी EV की बिक्री 75% बढ़ी — जानिए क्यों?

अक्टूबर 2026 में भारत में इलेक्ट्रिक कारों के रजिस्ट्रेशन 74.7% बढ़े, जबकि कुल कार बाजार 14.6% गिरा — EV की हिस्सेदारी एक साल में 3.6% से बढ़कर 7.3% हो गई।

India EV registrations October 2026 electric car charging

India EV registrations October 2026 के आंकड़े एक अजीब लेकिन साफ तस्वीर दिखाते हैं: जिस महीने भारत का कुल कार बाजार 14.6 प्रतिशत गिरा, उसी महीने इलेक्ट्रिक कारों के रजिस्ट्रेशन 74.7 प्रतिशत बढ़ गए। पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की बिक्री घटी, लेकिन बैटरी वाली गाड़ियों की मांग ने रफ्तार पकड़ ली। यह आंकड़ा 3 नवंबर 2026 को सामने आया है और यह बताता है कि भारत का कार बाजार अब दो अलग दिशाओं में चल रहा है।

पहले सीधे आंकड़े समझ लीजिए, फिर यह जानिए कि इसके पीछे वजह क्या है — और अगर आप कार खरीदने की सोच रहे हैं तो इसका आप पर क्या असर पड़ेगा।

India EV registrations October 2026 family buying electric car
भारत इलेक्ट्रिक कार रजिस्ट्रेशन अक्टूबर 2026 (प्रतीकात्मक फोटो)

India EV registrations October 2026: आंकड़े क्या कहते हैं

जेटो डायनेमिक्स के आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर 2026 में भारत में कुल पैसेंजर व्हीकल रजिस्ट्रेशन 5,01,406 रहे, जो पिछले साल के 5,87,103 से 14.6 प्रतिशत कम हैं। इसी दौरान इलेक्ट्रिक कारों के रजिस्ट्रेशन 20,979 से बढ़कर 36,646 हो गए — यानी 74.7 प्रतिशत की छलांग।

  • कुल रजिस्ट्रेशन: 5,01,406 (14.6% गिरावट)
  • इलेक्ट्रिक रजिस्ट्रेशन: 36,646 (74.7% बढ़ोतरी)
  • पेट्रोल-डीजल रजिस्ट्रेशन: 4,64,760 (17.9% गिरावट)
  • कुल बाजार में EV की हिस्सेदारी: 7.3% (पिछले साल 3.6% थी)

यानी हर 100 नई रजिस्टर्ड कारों में से अब 7 से ज्यादा इलेक्ट्रिक हैं, जबकि एक साल पहले यह संख्या 4 से भी कम थी। हिस्सेदारी का लगभग दोगुना होना इस बात का संकेत है कि EV अब सिर्फ शौकिया पसंद नहीं, बल्कि बाजार की मुख्यधारा की ओर बढ़ रही है।

कुल बाजार क्यों गिरा, जबकि EV बढ़ी?

सबसे बड़ी वजह त्योहारों का कैलेंडर है। पिछले साल दिवाली अक्टूबर में थी, इस साल 8 नवंबर को है। इसलिए अक्टूबर की रजिस्ट्रेशन तुलना में कम दिख रही है — बहुत से खरीदारों ने खरीदारी नवंबर के लिए टाल दी है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट भी यही कहती है कि रिटेल बिक्री में गिरावट मांग की कमजोरी से ज्यादा त्योहारों के समय के फर्क की वजह से है।

इसका सबूत थोक आंकड़ों (होलसेल डिस्पैच) में मिलता है। अक्टूबर में कंपनियों से डीलरों तक वाहनों की सप्लाई 12.4 प्रतिशत बढ़कर 5,28,384 रही। यानी गाड़ियां डीलरों तक पहुंच रही हैं, बस रजिस्ट्रेशन का कागज नवंबर में बनेगा। यही वजह है कि नवंबर के आंकड़े असली परीक्षा होंगे — वे बताएंगे कि अक्टूबर की गिरावट सिर्फ कैलेंडर का खेल थी या मांग में सच में नरमी है।

EV के बढ़ने की वजह अलग है। जेटो डायनेमिक्स के प्रेसिडेंट रवि भाटिया के मुताबिक, कीमतों की प्रतिस्पर्धा, ज्यादा रेंज और बेहतर ओनरशिप अनुभव EV को बढ़ा रहे हैं। साथ ही, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की रिटेल बिक्री भी अक्टूबर में 48 प्रतिशत बढ़ी है — यानी दोपहिया से लेकर कार तक, इलेक्ट्रिक की लहर चौड़ी हो रही है।

कंपनीवार हाल: कौन आगे, कौन पीछे

टाटा मोटर्स ने अक्टूबर में 14,560 इलेक्ट्रिक कारें रजिस्टर कीं, जो 76.3 प्रतिशत ज्यादा हैं। टाटा की हर पांचवीं रजिस्टर्ड कार अब इलेक्ट्रिक है। कंपनी ने यह भी बताया कि उसकी पंच ईवी ने पहली बार एक महीने में 5,000 का आंकड़ा पार किया है और मांग सप्लाई से ज्यादा है, इसलिए उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।

महिंद्रा की EV रजिस्ट्रेशन 84.2 प्रतिशत बढ़कर 8,473 पहुंचीं और उसकी कुल बिक्री में EV की हिस्सेदारी 6.3 प्रतिशत से बढ़कर 13.2 प्रतिशत हो गई। जनवरी से अक्टूबर तक के दस महीनों में टाटा (1,17,547), महिंद्रा (66,945) और एमजी (55,016) ने मिलकर देश के 83 प्रतिशत से ज्यादा इलेक्ट्रिक कार रजिस्ट्रेशन पर कब्जा जमाया हुआ है।

दूसरी तरफ पारंपरिक दिग्गजों की रजिस्ट्रेशन घटी: मारुति सुजुकी 15.2 प्रतिशत गिरकर 2,11,529, हुंडई 16.6 प्रतिशत गिरकर 57,915 और किया 13.4 प्रतिशत गिरकर 30,667 रही। एमजी 4.3 प्रतिशत बढ़ी और निसान 23 प्रतिशत बढ़ी।

खरीदार के लिए इसका मतलब क्या है?

अगर आप नई कार लेने की सोच रहे हैं तो तीन बातें ध्यान में रखिए। पहली, EV के विकल्प अब पहले से कहीं ज्यादा हैं — कीमत, रेंज और मॉडल, तीनों मोर्चों पर कंपनियां एक-दूसरे से टकरा रही हैं, जिससे खरीदार को फायदा है। दूसरी, चार्जिंग नेटवर्क और सर्विस का सवाल अब भी हर शहर में एक जैसा नहीं है, इसलिए अपनी रोज की दूरी और चार्जिंग सुविधा देखकर ही फैसला लें। तीसरी, दिवाली (8 नवंबर) के आसपास डीलरों पर ऑफर और स्टॉक दोनों की हलचल तेज रहेगी — नवंबर के रजिस्ट्रेशन आंकड़े आने के बाद तस्वीर और साफ होगी।

आगे क्या देखना है

नवंबर का महीना इस कहानी का असली टेस्ट होगा। अगर त्योहारों की खरीदारी के साथ कुल रजिस्ट्रेशन वापस उछलते हैं और EV की हिस्सेदारी 7 प्रतिशत से ऊपर टिकी रहती है, तो यह साफ हो जाएगा कि इलेक्ट्रिक की बढ़त कैलेंडर का इत्तेफाक नहीं, बल्कि स्थायी बदलाव है। फिलहाल एक बात पक्की है — भारत की सड़कों पर पेट्रोल-डीजल की आवाज धीमी पड़ रही है और बैटरी की खामोशी बढ़ रही है।

और पढ़ें: टाटा पंच ईवी, बीवाईडी की रिकॉर्ड ईवी बिक्री और इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बिक्री। स्रोत: Marksmen Daily और TradingView / Moody’s।

लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

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