अगर आपके पास कार या बाइक है, तो यह खबर सीधे आपकी जेब से जुड़ी है। मोटर इंश्योरेंस नया नियम 15 दिसंबर 2026 से लागू होने जा रहा है। बीमा नियामक IRDAI ने प्राइवेट कार और टू-व्हीलर की पॉलिसी के लिए चार लेयर वाला नया ढांचा तय किया है। इसका मतलब यह है कि अब पॉलिसी एक बंधा-बंधाया पैकेज नहीं रहेगी, बल्कि हर कवर अलग-अलग नजर आएगा और आप अपनी जरूरत के हिसाब से चुन सकेंगे कि आपको क्या चाहिए और क्या नहीं।
एक नजर में — क्या-क्या बदल रहा है
- 15 दिसंबर 2026 से नया ढांचा लागू होगा, और यह प्राइवेट कार और टू-व्हीलर पर लागू होगा।
- पॉलिसी चार हिस्सों में बंटेगी: थर्ड पार्टी लायबिलिटी, यात्रियों की कानूनी देनदारी, पर्सनल एक्सीडेंट कवर और ओन डैमेज कवर।
- थर्ड पार्टी कवर अनिवार्य रहेगा, बाकी कवर आपकी पसंद से चुने जा सकेंगे।
- हर कंपनी को एक जैसी पॉलिसी शब्दावली और एक जैसा ऑप्शन फॉर्म देना होगा।
- खरीदते समय Customer Information Sheet मिलेगी, जिसमें हर कवर और उसका प्रीमियम साफ-साफ लिखा होगा।
- सरकारी प्लेटफॉर्म Bima Sugam पर भी ये प्रोडक्ट 15 दिसंबर से ही उपलब्ध होंगे।

चार लेयर का मतलब आसान भाषा में
मोटर इंश्योरेंस नया नियम के तहत पहली लेयर है थर्ड पार्टी लायबिलिटी। आपकी गाड़ी से किसी दूसरे व्यक्ति या उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचे, तो उसके मुआवजे का कवर इसी में आता है। यह कानूनन अनिवार्य है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
दूसरी लेयर है यात्रियों की कानूनी देनदारी। कार में बैठे साथियों या बाइक के पीछे बैठे व्यक्ति को हुए नुकसान की कानूनी जिम्मेदारी का कवर इसमें मिलेगा। अब तक यह हिस्सा पॉलिसी के भीतर दफन-सा रहता था, अब यह अलग से दिखेगा।
तीसरी लेयर है पर्सनल एक्सीडेंट कवर, जो वाहन मालिक के लिए दुर्घटना में चोट या मृत्यु की स्थिति में काम आता है। इस पर पहले से लागू अनिवार्य पर्सनल एक्सीडेंट नियम साथ में लागू रहेंगे।
चौथी लेयर है ओन डैमेज कवर, यानी आपकी अपनी गाड़ी को दुर्घटना, चोरी, आग या प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का कवर। इसकी कीमत कंपनियां बाजार की स्थिति के हिसाब से तय करती रहेंगी, इसलिए इस हिस्से में कंपनियों के बीच फर्क बना रहेगा।
मोटर इंश्योरेंस नया नियम आपकी जेब पर कैसे असर डालेगा
सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता का है। अब तक कई लोग यह जाने बिना ही पूरा पैकेज ले लेते थे कि किस कवर के लिए कितना पैसा जा रहा है। मोटर इंश्योरेंस नया नियम के तहत हर कवर का प्रीमियम अलग-अलग दिखेगा, तो आप यह तय कर सकेंगे कि कौन-सा कवर आपकी जरूरत का है और कौन-सा नहीं। एक जैसी शब्दावली होने से अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसियों की तुलना करना भी आसान हो जाएगा। यह ध्यान रखना जरूरी है कि नियामक ने प्रीमियम घटने का कोई वादा नहीं किया है — ओन डैमेज की कीमत अब भी कंपनी और गाड़ी पर निर्भर करेगी।
पुरानी पॉलिसी वालों के लिए क्या व्यवस्था है
जिनकी पॉलिसी पहले से चल रही है, वे पॉलिसी अवधि के दौरान अतिरिक्त प्रीमियम देकर यात्रियों या पिलियन राइडर की कानूनी देनदारी वाला कवर जुड़वा सकेंगे। नई पॉलिसी खरीदते समय या रिन्यूअल के समय मोटर इंश्योरेंस नया नियम लागू होगा, इसलिए रिन्यूअल के वक्त मिलने वाले ऑप्शन फॉर्म को ध्यान से भरना सबसे अहम कदम होगा।
रिन्यूअल से पहले ये 5 बातें जरूर जांचें
मोटर इंश्योरेंस नया नियम को ध्यान में रखते हुए, पहला, ऑप्शन फॉर्म में हर कवर के सामने टिक लगाने से पहले अपनी जरूरत तय करें, एजेंट की बात पर आंख बंद करके भरोसा न करें। दूसरा, Customer Information Sheet में हर कवर का प्रीमियम अलग-अलग देखें। तीसरा, साथी यात्रियों या पिलियन का कवर लेना है या नहीं, यह परिवार की जरूरत से तय करें। चौथा, ओन डैमेज में IDV यानी गाड़ी की बीमित कीमत और डिडक्टिबल यानी क्लेम के समय आपकी जेब से जाने वाली रकम समझ लें। पांचवां, ऑनलाइन हो या ऑफलाइन, हर जगह यही फॉर्म मिलेगा — जल्दबाजी में बिना पढ़े हस्ताक्षर न करें।
यह बदलाव क्यों आया
मोटर इंश्योरेंस नया नियम IRDAI ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के पालन में जारी किया है — National Insurance Company Ltd बनाम थुंगला धन लक्ष्मी और अन्य का मामला। नियामक का मकसद साफ है: ग्राहक को चुनने की आजादी देना और पॉलिसी को पारदर्शी बनाना, ताकि बीमा की भाषा आम आदमी की समझ से बाहर न रहे।
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मोटर इंश्योरेंस नया नियम के तहत 15 दिसंबर दूर नहीं है। अगर आपकी पॉलिसी का रिन्यूअल दिसंबर में पड़ रहा है, तो नया फॉर्म ही मिलेगा — दस्तावेज तैयार रखें और हर कवर को समझकर ही चुनें।

