भारत के घरों में रसोई का एक जाना-पहचाना नजारा है — किराने की दुकान से तौलकर लिया गया खुला हल्दी-मिर्ची का पाउडर, अखबार या प्लास्टिक की थैली में लिपटा हुआ। यह सस्ता पड़ता है और स्वाद भी तेज लगता है। लेकिन महाराष्ट्र में अब यह व्यवस्था बदलने जा रही है, और बदलाव की वजह आपकी सेहत से जुड़ी है।
महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को एक बड़ा आदेश जारी किया है — पूरे राज्य में खुले और अनपैक्ड मसाला पाउडर तथा मिश्रित मसालों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस महाराष्ट्र खुले मसाले बैन के बाद अब हल्दी, मिर्ची, धनिया, जीरा जैसे मसाले खुले में तौलकर नहीं बेचे जा सकेंगे। इन्हें निर्माण स्थल पर ही पैक और सील करके बेचना होगा।

FDA का आदेश: किन-किन पर लागू होगा?
यह आदेश खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंधे ने जारी किया है। इसमें मसालों के उत्पादन, प्रोसेसिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री से जुड़े सभी पक्षों को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 और उससे जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।
आदेश का दायरा सिर्फ दुकानदारों तक सीमित नहीं है। यह निर्माताओं, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, व्यापारियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, होटल, रेस्टोरेंट, कैटरर और संस्थागत किचन — यानी मसालों की पूरी सप्लाई चेन पर लागू होगा।
महाराष्ट्र खुले मसाले बैन: किन मसालों पर रोक?
बैन का दायरा काफी व्यापक है। इसमें शामिल हैं:
- हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, जीरा
- काली मिर्च, दालचीनी, इलायची, लौंग
- हींग, केसर, पोस्ता दाना, गरम मसाला और अन्य मिश्रित मसाले
क्यों उठाया गया यह कदम?
FDA के मुताबिक, खुले मसालों में मिलावट और गंदगी का खतरा सबसे ज्यादा होता है। खुले में बिकने वाले मसालों में न तो शुद्धता की गारंटी होती है, न ही यह पता चलता है कि वे कहां बने, किसने बनाए और कब पैक हुए। ऐसे में शिकायत या ट्रेसबिलिटी लगभग असंभव हो जाती है।
आदेश में हानिकारक रंगों पर भी सख्ती दिखाई गई है। FDA ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि मसालों में मेटानिल येलो, रोडामाइन बी, सूडान डाई और लेड क्रोमेट जैसे प्रतिबंधित रंगों का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित है। ये रंग हल्दी और मिर्ची में चमक लाने के लिए मिलाए जाते हैं, लेकिन सेहत के लिए गंभीर खतरा हैं। साथ ही मसालों को कीटाणुमुक्त करने के लिए एथिलीन ऑक्साइड गैस के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है।
निर्माताओं के लिए स्वच्छता के सख्त नियम भी तय किए गए हैं। मसालों को सार्वजनिक सड़कों, तारकोल वाली सतहों, नालियों, कूड़ेदानों या गोशालाओं के पास सुखाने पर रोक होगी। उत्पादन और भंडारण केंद्र साफ, सूखे और कीट-मुक्त होने चाहिए, और मसालों को रसायनों, कीटनाशकों, औद्योगिक रंगों या अन्य खतरनाक पदार्थों के साथ नहीं रखा जा सकेगा।
लेबलिंग के नए नियम: पैकेट पर क्या-क्या छपना जरूरी?
नए निर्देशों के तहत पैकेट पर ये जानकारियां देना अनिवार्य होगा:
- उत्पाद का नाम और पूरी सामग्री सूची
- निर्माता की जानकारी और FSSAI लाइसेंस नंबर
- बैच नंबर, निर्माण या पैकेजिंग की तारीख
- ‘यूज बाय’ या ‘बेस्ट बिफोर’ तारीख
कंपनियां शुद्धता, ऑर्गेनिक प्रकृति या स्वास्थ्य लाभ जैसे दावे बिना ठोस सबूत के नहीं कर सकेंगी। इतना ही नहीं, सिर्फ ट्रेड लाइसेंस के आधार पर मसालों का निर्माण या पिसाई नहीं होगी — इसके लिए FSSAI का लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है।
आम उपभोक्ता पर क्या असर पड़ेगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या मसाले महंगे होंगे? सीलबंद पैकेजिंग, लेबलिंग और FSSAI अनुपालन से लागत कुछ बढ़ सकती है, लेकिन FDA का तर्क है कि इसका सीधा फायदा उपभोक्ता की सेहत को मिलेगा। अब पैकेट पर FSSAI लाइसेंस नंबर, बैच नंबर और निर्माण तारीख देखकर आप यह तय कर सकेंगे कि क्या खरीद रहे हैं — और गड़बड़ी होने पर शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे। खुले मसालों में यह संभव नहीं था।
छोटे दुकानदारों के लिए यह बदलाव चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि अब उन्हें सीलबंद मसाले ही रखने होंगे। लेकिन बड़े स्तर पर देखें तो यह कदम मिलावट के खिलाफ लंबे समय से चली आ रही लड़ाई में एक मजबूत मोर्चा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: क्या महाराष्ट्र में खुले मसाले अब पूरी तरह बैन हैं?
उत्तर: हां, खुले और अनपैक्ड मसाला पाउडर तथा मिश्रित मसालों की बिक्री पर रोक है। इन्हें निर्माण स्थल पर ही पैक और सील करके बेचना होगा।
प्रश्न: क्या रेस्टोरेंट और होटल पर भी यह नियम लागू होगा?
उत्तर: हां, होटल, रेस्टोरेंट, कैटरर और संस्थागत किचन भी इस दायरे में हैं। उन्हें भी सीलबंद मसाले ही खरीदने होंगे।
प्रश्न: नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई होगी?
उत्तर: FDA ने चेतावनी दी है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाले कारोबारों के खिलाफ सख्त प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्न: क्या यह नियम पूरे देश में लागू है?
उत्तर: फिलहाल यह आदेश सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित है। हालांकि खाद्य सुरक्षा को लेकर उठाया गया यह कदम दूसरे राज्यों के लिए भी नज़ीर बन सकता है।
निष्कर्ष
रसोई की थाली से लेकर सेहत तक — मसालों की शुद्धता हर भारतीय परिवार से जुड़ा मुद्दा है। महाराष्ट्र FDA का यह फैसला दिखाता है कि मिलावट के खिलाफ अब सिर्फ छापेमारी नहीं, बल्कि सिस्टम-स्तर पर बदलाव की तैयारी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस आदेश का जमीनी पालन कितनी सख्ती से होता है और क्या दूसरे राज्य भी इसी राह पर चलते हैं।

