PFC REC merger: भारत की दो सबसे बड़ी सरकारी बिजली वित्त कंपनियों — पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और REC लिमिटेड — के विलय की प्रक्रिया को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से हरी झंडी मिल गई है। REC लिमिटेड ने 15 अक्टूबर 2026 को BSE फाइलिंग के जरिए बताया कि RBI ने प्रस्तावित PFC REC merger के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NoC) जारी कर दिया है। विलय पूरा होने पर देश में ₹11 लाख करोड़ से अधिक की लोन बुक वाली एक विशाल पावर फाइनेंस संस्था बन जाएगी।
प्रमुख बिंदु
- RBI ने 15 अक्टूबर 2026 को विलय को NoC दिया; REC ने BSE फाइलिंग में जानकारी दी
- 28 जून 2026 को दोनों कंपनियों के बोर्ड ने विलय योजना (स्कीम ऑफ मर्जर) को मंजूरी दी थी
- शेयर एक्सचेंज रेशियो: हर 100 REC इक्विटी शेयर पर 88 PFC इक्विटी शेयर; रिकॉर्ड डेट बाद में तय होगी
- विलय से बनेगी ₹11 लाख करोड़ से अधिक कुल लोन बुक वाली फाइनेंसिंग संस्था
- अब दोनों कंपनियों के शेयरधारकों-ऋणदाताओं और अन्य नियामकों की मंजूरी बाकी

क्या हुआ: RBI की NoC और बोर्ड की मंजूरी
विलय की योजना के मुताबिक REC लिमिटेड ट्रांसफरर (स्थानांतरित होने वाली) कंपनी होगी और PFC ट्रांसफरी (विलय प्राप्त करने वाली) कंपनी होगी। यह योजना कंपनीज एक्ट, 2013 की धारा 230 से 232 के तहत तैयार की गई है, जिसे 28 जून 2026 को दोनों कंपनियों के बोर्डों ने मंजूरी दी थी। REC द्वारा BSE को दी गई जानकारी के अनुसार, RBI की NoC इस प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण नियामकीय सीढ़ी है — CNBC-TV18 और द हिंदू बिजनेसलाइन दोनों ने खबर की पुष्टि की है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि विलय पूरा हो गया — यह लंबी प्रक्रिया का एक पड़ाव मात्र है।
क्यों अहम है यह PFC REC merger?
पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और REC लिमिटेड दोनों ही बिजली क्षेत्र को कर्ज देने वाली बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की नॉन-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFC) हैं। विलय के बाद बनने वाली संस्था की लोन बुक ₹11 लाख करोड़ से अधिक होगी — देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंसिंग संस्थाओं में से एक। इससे तीन बड़े फायदे हो सकते हैं: बड़ी संस्था सस्ती दरों पर फंड जुटा सकती है, बिजली-इंफ्रा परियोजनाओं के बड़े कर्ज एक ही खिड़की से मिल सकेंगे, और संचालन खर्च घटकर बैलेंस शीट मजबूत होगी। सरकार ने पहले कई सार्वजनिक बैंकों का भी विलय इसी सोच के साथ किया था — उसी कड़ी में यह PFC REC merger देखा जा रहा है।
शेयरधारकों के लिए क्या मायने रखता है एक्सचेंज रेशियो?
स्कीम ऑफ मर्जर के तहत शेयर एक्सचेंज रेशियो तय किया गया है: REC के हर 100 इक्विटी शेयर (फेस वैल्यू ₹10) के बदले PFC के 88 इक्विटी शेयर (फेस वैल्यू ₹10) मिलेंगे — यानी हिस्सेदारी के अनुपात में PFC के शेयर। रिकॉर्ड डेट बाद में तय की जाएगी, इसलिए शेयरधारकों को अभी कोई तत्काल कदम उठाने की जरूरत नहीं है। विलय से पहले दोनों शेयरों में बाजार हलचल संभव है, लेकिन अंतिम असर सभी नियामकीय मंजूरियां मिलने के बाद ही तय होगा।
आगे की राह: कौन-कौन सी मंजूरियां बाकी हैं?
RBI की NoC के बाद भी कई मंजूरियां बाकी हैं: इस PFC REC merger को दोनों कंपनियों के शेयरधारकों और ऋणदाताओं (creditors) की सहमति चाहिए, साथ ही अन्य वैधानिक और नियामकीय मंजूरियां। कंपनीज एक्ट की धारा 230-232 के तहत स्कीम को NCLT की स्वीकृति भी लेनी होगी, और सेबी सहित अन्य नियामकों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। वित्त क्षेत्र में बड़े फैसलों पर नियामकों और अदालतों की निगरानी कितनी अहम होती है, यह हाल के यस बैंक AT1 बॉन्ड मामले से समझा जा सकता है — जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने बॉन्ड के राइट-ऑफ को गैरकानूनी ठहराया था। वहीं प्राइवेट सेक्टर में बड़े पूंजी जुटाने के घटनाक्रम भी चल रहे हैं — जियो प्लेटफॉर्म्स के आगामी IPO पर हमारी खबर पढ़ें।
निवेशकों और आम पाठकों के लिए इसका मतलब क्या है?
आम पाठक के लिए खबर इसलिए अहम है कि बिजली क्षेत्र की फाइनेंसिंग सीधे बिजली दरों, परियोजनाओं की गति और देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ती है। मजबूत फाइनेंसिंग संस्था का मतलब है पावर परियोजनाओं को सस्ता और आसान कर्ज। निवेशकों के लिए संदेश साफ है: विलय की दिशा में बढ़त तय है, लेकिन रिकॉर्ड डेट और शेष मंजूरियों की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें। अफवाहों पर निर्णय न लें — टेक महिंद्रा के हालिया तिमाही नतीजों ने भी यही दिखाया था कि आधिकारिक आंकड़े ही निवेश का आधार होने चाहिए।
निष्कर्ष
RBI की NoC के बाद PFC-REC विलय अब कागजों से जमीनी प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है। शेष मंजूरियां समय पर मिलने पर भारत को ₹11 लाख करोड़ से बड़ी लोन बुक वाली एक शक्तिशाली सरकारी पावर फाइनेंस संस्था मिलेगी। यह PFC REC merger ऊर्जा क्षेत्र के वित्त पोषण में नए युग की शुरुआत हो सकता है — बशर्ते नियामकीय प्रक्रिया बिना रुकावट पूरी हो।
स्रोत: The Hindu BusinessLine, CNBC-TV18

