यहां आपका IPO लिस्टिंग वाला आर्टिकल है, जिसमें दिए गए चारों URLs को relevant जगहों पर natural anchor text के साथ जोड़ दिया गया है:
ARTICLE:
शेयर बाजार खुलते ही बुधवार की सुबह ट्रेडिंग स्क्रीन पर तीन नए नाम चमकने लगे। पिछले कुछ दिनों से जिन तीन IPO को लेकर निवेशकों के बीच खासी हलचल थी, आज उन्हीं का असली इम्तिहान था। सवाल यह था कि जिस ग्रे मार्केट प्रीमियम ने पिछले एक हफ्ते से उम्मीदें बढ़ा रखी थीं, क्या असली बाजार भी उतना ही उदार साबित होगा, या फिर हकीकत कुछ और निकलेगी।
तीनों कंपनियां — ग्लास वॉल सिस्टम्स, कनोहर इलेक्ट्रिकल्स और प्रासोल केमिकल्स — 8 सितंबर को बोली के लिए खुली थीं और 10 सितंबर को बंद हुई थीं। तीनों का अलॉटमेंट 11 सितंबर को फाइनल हुआ, और आज यानी 16 सितंबर को इन्हें एक साथ NSE और BSE पर लिस्ट होना था। जिस तरह से सब्सक्रिप्शन के आंकड़े आए थे, उससे यह तय था कि आज का दिन शेयर बाजार के लिए दिलचस्प रहने वाला है।
किसने बाजी मारी, किसने चूका मौका
दिन खत्म होते-होते तस्वीर साफ हो गई। तीन में से दो कंपनियों ने निवेशकों को मुनाफा दिया, जबकि तीसरी कंपनी के शेयर इश्यू प्राइस से नीचे फिसल गए।
ग्लास वॉल सिस्टम्स का शेयर ₹182 के इश्यू प्राइस पर करीब 6 प्रतिशत के प्रीमियम के साथ लिस्ट हुआ। यह आंकड़ा उतना बड़ा नहीं था जितना ग्रे मार्केट पिछले कुछ दिनों से संकेत दे रहा था, जहां प्रीमियम कभी 25 से 35 प्रतिशत तक आंका जा रहा था। कनोहर इलेक्ट्रिकल्स की कहानी भी कुछ मिलती-जुलती रही। ₹632 के इश्यू प्राइस वाला यह शेयर करीब 8 प्रतिशत प्रीमियम पर लिस्ट हुआ, जबकि लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में इसका प्रीमियम 36 प्रतिशत के आसपास चल रहा था।
वहीं प्रासोल केमिकल्स के साथ मामला उलट रहा। कंपनी का शेयर ₹676 के इश्यू प्राइस से नीचे लिस्ट हुआ, ठीक वैसे ही जैसा लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में हल्की गिरावट के संकेत मिल रहे थे। दिलचस्प बात यह है कि यह लिस्टिंग ठीक उस दौर में हुई जब शेयर बाजार में एक दिन पहले आई भारी गिरावट को लेकर निवेशकों में पहले से ही सतर्कता का माहौल था।
तीनों कंपनियों को इतनी भारी बोली क्यों मिली
तीनों इश्यू के सब्सक्रिप्शन आंकड़ों में जमीन-आसमान का फर्क देखने को मिला। कनोहर इलेक्ट्रिकल्स को सबसे ज्यादा 90.59 गुना बोली मिली, जबकि ग्लास वॉल सिस्टम्स को 81.65 गुना निवेशकों का समर्थन मिला। इसके उलट प्रासोल केमिकल्स को सिर्फ 3.47 गुना ही सब्सक्रिप्शन मिल पाया — जो बाकी दोनों की तुलना में काफी फीका रहा।
यही अंतर आगे चलकर लिस्टिंग के प्रदर्शन में भी झलका। जिस कंपनी को निवेशकों का जितना ज्यादा भरोसा मिला, बाजार ने भी उसे उतना ही सम्मान दिया।
ग्लास वॉल सिस्टम्स: फसाड़ और शीशे के काम में जमी कंपनी
ग्लास वॉल सिस्टम्स फसाड़ और फेनेस्ट्रेशन यानी इमारतों की बाहरी शीशे की दीवारों और खिड़कियों के डिजाइन-निर्माण का काम करती है। कंपनी की मौजूदगी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में भी इसके प्रोजेक्ट चल रहे हैं। ₹427.89 करोड़ के इस इश्यू में ₹60 करोड़ फ्रेश शेयरों के जरिए जुटाए गए, जबकि बाकी हिस्सा मौजूदा शेयरधारकों की बिक्री (ऑफर फॉर सेल) का था। कंपनी का इरादा जुटाई गई रकम से महाराष्ट्र के विले भागड़ में अपनी ग्लास प्रोसेसिंग यूनिट को आगे बढ़ाने का है।
कनोहर इलेक्ट्रिकल्स: ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली पुरानी कंपनी
कनोहर इलेक्ट्रिकल्स दशकों पुरानी कंपनी है, जो बिजली पारेषण और वितरण के लिए ट्रांसफॉर्मर बनाती है। मेरठ, उत्तर प्रदेश में इसके दो प्लांट हैं, जिनकी कुल क्षमता 19,200 MVA है। कंपनी का काम सिर्फ ट्रांसफॉर्मर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सब-स्टेशन और ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के EPC प्रोजेक्ट भी संभालती है। ₹1,055.74 करोड़ के इस इश्यू के जरिए कंपनी ने ₹300 करोड़ फ्रेश इश्यू से जुटाए, जबकि बाकी हिस्सा OFS का रहा।
प्रासोल केमिकल्स: सट्टे में पिछड़ी, संख्या में मजबूत
प्रासोल केमिकल्स स्पेशियलिटी केमिकल्स बनाने वाली कंपनी है, जो एसीटोन और फास्फोरस आधारित 150 से ज्यादा तरह के रसायन तैयार करती है। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी के वित्तीय आंकड़े मजबूत दिखते हैं — वित्त वर्ष 2026 में इसका राजस्व ₹1,237.85 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹1,015.54 करोड़ था, और मुनाफा ₹43.57 करोड़ से बढ़कर ₹83.12 करोड़ हो गया। इसके बावजूद बाजार ने इसे उतना उत्साह से नहीं लिया, जितना बाकी दो कंपनियों को मिला।
ग्रे मार्केट और असली लिस्टिंग गेन में इतना फासला क्यों
यह पहला मौका नहीं है जब ग्रे मार्केट प्रीमियम और असली लिस्टिंग गेन के बीच बड़ा गैप दिखा हो। ग्रे मार्केट पूरी तरह अनौपचारिक और अनियंत्रित होता है, जहां कारोबारी अपने अंदाजे और मांग-आपूर्ति के हिसाब से भाव तय करते हैं। असली बाजार में लिस्टिंग के वक्त व्यापक मार्केट सेंटीमेंट, उस दिन के सेक्टर के रुझान और बड़े निवेशकों की रणनीति जैसे कई और कारण असर डालते हैं।
ऐसे उतार-चढ़ाव भरे माहौल में कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा पारंपरिक विकल्पों में भी रखना पसंद करते हैं, और इसी वजह से सोने की बढ़ती कीमतों पर भी उनकी नजर लगातार बनी रहती है।
आगे और भी बड़े IPO की तैयारी
इस साल IPO मार्केट में हलचल यहीं खत्म नहीं होने वाली। निवेशकों की निगाहें अब उन बड़े इश्यू पर भी टिकी हैं जो आने वाले महीनों में दस्तक दे सकते हैं, जिनमें से टाटा सन्स के संभावित IPO को लेकर चल रही चर्चा सबसे ज्यादा सुर्खियों में है।
निवेशकों के लिए क्या
जिन निवेशकों को ग्लास वॉल सिस्टम्स और कनोहर इलेक्ट्रिकल्स में अलॉटमेंट मिला है, उनके लिए आज हल्की मुस्कान का मौका जरूर रहा, भले ही मुनाफा उम्मीद से कम रहा हो। वहीं प्रासोल केमिकल्स में पैसा लगाने वालों को शुरुआती दिन नुकसान से गुजरना पड़ा। बाजार जानकार आमतौर पर यही सलाह देते हैं कि किसी भी नई लिस्टेड कंपनी को लेकर फैसला सिर्फ पहले दिन के प्रदर्शन के आधार पर नहीं, बल्कि कंपनी के बिजनेस मॉडल, आगे की ग्रोथ और सेक्टर के रुझान को देखकर लेना चाहिए।
डिजिटल पेमेंट और निवेश दोनों मोर्चों पर बदलाव तेजी से हो रहे हैं — मसलन हाल ही में UPI पर लगने वाले संभावित चार्ज को लेकर आई सरकारी स्पष्टता भी आम निवेशकों के लिए जानना जरूरी है। जिन्होंने लंबी अवधि के नजरिए से आवेदन किया था, उनके लिए आज का उतार-चढ़ाव सिर्फ शुरुआत भर है, अंतिम फैसला नहीं।