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बुधवार, 16 सितम्बर 2026
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राहुल गांधी का UPI चार्ज पर हमला, MDR से फिनटेक शेयर उछले

एक ही खबर, तीन अलग रंग — कोई इसे सरकार पर हमले का मौका बता रहा है, कोई इसे मुनाफे का जरिया मान रहा है, तो कोई अपनी दुकान की कमाई को लेकर चिंतित है।

UPI MDR rules Rahul Gandhi Paytm MobiKwik shares

एक ही सरकारी अधिसूचना, लेकिन प्रतिक्रियाएं बिल्कुल अलग-अलग दिशाओं में जा रही हैं। कोई इसे जनता के खिलाफ साजिश बता रहा है, तो शेयर बाजार में इसी खबर पर कुछ कंपनियों के निवेशक जश्न मना रहे हैं। बीच में खड़े हैं वो लाखों छोटे-बड़े दुकानदार, जो अब यह हिसाब लगाने में जुटे हैं कि आने वाले दिनों में उनकी जेब पर क्या असर पड़ने वाला है।

मामला वही है जिसकी चर्चा पिछले कुछ दिनों से चल रही है — ₹2,000 से ज्यादा के UPI मर्चेंट पेमेंट पर चार्ज। लेकिन अब जब सरकार और NPCI की तरफ से इसके ब्योरे सामने आ चुके हैं, तो बहस सिर्फ नीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने राजनीति और शेयर बाजार, दोनों मोर्चों पर हलचल मचा दी है।

राहुल गांधी का सीधा हमला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर मोदी सरकार पर तीखा वार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने चुपचाप UPI पर चार्ज लगाने का रास्ता खोल दिया है, और यह अमेरिकी कंपनियों के दबाव में उठाया गया कदम है। उनका तर्क है कि भले ही ग्राहक से सीधे पैसे न लिए जाएं, लेकिन जिस मर्चेंट पर MDR थोपा जाएगा, वह उस लागत को आगे चलकर सामान की कीमत बढ़ाकर ग्राहक तक ही पहुंचाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इसी लाइन पर सरकार को घेरा है।

सरकार की तरफ से जवाब में यही दोहराया गया है कि P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाला कोई भी लेनदेन, चाहे राशि कितनी भी हो, पूरी तरह मुफ्त बना रहेगा, और छोटे व्यापारियों को भी इससे बाहर रखा गया है।

अब स्पष्ट हो गए हैं MDR के नियम

राजनीतिक बहस के बीच सरकार और NPCI ने आखिरकार MDR का पूरा ढांचा सार्वजनिक कर दिया है, जो 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। इसके मुताबिक ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर सामान्य दर से 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा। मिसाल के तौर पर अगर कोई ग्राहक किसी दुकानदार को ₹3,000 का पेमेंट करता है, तो दुकानदार को करीब ₹12 का शुल्क देना होगा, और ₹50,000 के पेमेंट पर यह राशि ₹200 तक पहुंच जाएगी। हालांकि बड़ी रकम के लेनदेन के लिए राहत भी रखी गई है — जैसा कि एक विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया है, ₹75,000 या उससे ज्यादा के किसी भी पेमेंट पर अधिकतम ₹300 का ही शुल्क लगेगा, चाहे रकम कितनी भी बड़ी क्यों न हो।

रेलवे टिकट, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि से जुड़े भुगतानों को इस दायरे से अलग रखा गया है — यहां चाहे रकम कितनी भी हो, सिर्फ ₹5 का फ्लैट चार्ज लगेगा। इसके अलावा जो छोटे दुकानदार महीने में ₹1 लाख तक का लेनदेन QR कोड के जरिए करते हैं, उन्हें पूरी तरह जीरो-MDR की छूट में रखा गया है, ताकि छोटे कारोबार पर कोई बोझ न पड़े। इससे पहले ₹2,000 तक के हर UPI और RuPay लेनदेन को लेकर सरकार जो स्पष्टीकरण दे चुकी है, उसकी पूरी जानकारी हमारी पिछली रिपोर्ट में विस्तार से दी गई है।

थोक कारोबारियों में असमंजस

नए नियम को लेकर छोटे और मंझोले व्यापारियों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। थोक बाजार से जुड़े कई कारोबारी मानते हैं कि उनका ज्यादातर लेनदेन ₹2,000 से ऊपर का होता है, इसलिए भले ही दर मामूली रखी गई हो, बड़ी संख्या में लेनदेन होने पर सालाना आधार पर यह रकम अच्छी-खासी बन सकती है। व्यापारी संगठनों का एक तबका इस बात पर सहमति भी जता चुका है कि अगर इससे डिजिटल पेमेंट का पूरा ढांचा मजबूत और भरोसेमंद बनता है, तो एक मामूली शुल्क देने में हर्ज नहीं, बशर्ते दर कम रहे और छोटे कारोबारियों को इससे राहत मिलती रहे।

फिनटेक कंपनियों के शेयरों में उछाल

जहां आम व्यापारी असमंजस में हैं, वहीं शेयर बाजार में फिनटेक कंपनियों के लिए यह खबर राहत लेकर आई। Paytm की पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस, मोबिक्विक और पाइन लैब्स जैसी कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला। दरअसल अब तक इन पेमेंट कंपनियों के लिए UPI लेनदेन जीरो-MDR मॉडल पर चलता आया था, यानी इससे इन्हें सीधा राजस्व नहीं मिलता था। अब जब बड़े मूल्य के मर्चेंट लेनदेन पर शुल्क तय हो गया है, तो निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में इन कंपनियों के लिए यह एक नया कमाई का जरिया बन सकता है, जिसे बाजार जानकार करीब पांच हजार करोड़ रुपये तक के संभावित राजस्व अवसर के तौर पर देख रहे हैं।

हालांकि हर विश्लेषक इतना उत्साहित नहीं है। कुछ फंड मैनेजरों का कहना है कि चूंकि ये कंपनियां पहले से ही UPI से सीधी कमाई नहीं कर रही थीं, इसलिए तत्काल असर उतना बड़ा नहीं होगा जितना शेयरों की उछाल से लग रहा है, और असली तस्वीर तभी साफ होगी जब अक्टूबर से नियम लागू होने के बाद वास्तविक राजस्व के आंकड़े सामने आएंगे।

आम ग्राहक के लिए इसका मतलब क्या है

रोजमर्रा के इस्तेमाल की बात करें तो ज्यादातर लोगों के लिए फिलहाल कुछ नहीं बदलता। दोस्तों-परिवार के बीच पैसे भेजना, छोटी दुकान पर पेमेंट करना, या ₹2,000 से कम का कोई भी लेनदेन — यह सब पहले की तरह मुफ्त बना रहेगा। बदलाव सिर्फ उन बड़े व्यापारियों को महसूस होगा जिनका टर्नओवर तय सीमा से ज्यादा है और जो ₹2,000 से ऊपर के पेमेंट स्वीकार करते हैं। असली सवाल यही है कि क्या ये व्यापारी इस मामूली लागत को खुद वहन करेंगे, या धीरे-धीरे इसे सामान की कीमतों में जोड़कर ग्राहक तक पहुंचाएंगे — और यही वह बिंदु है जिस पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

आने वाले हफ्तों में जैसे-जैसे 15 अक्टूबर की समयसीमा नजदीक आएगी, इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की पूरी संभावना है, जबकि बाजार की निगाहें इस बात पर टिकी रहेंगी कि नया शुल्क ढांचा फिनटेक कंपनियों की बैलेंस शीट पर असल में कितना असर डालता है।

लेखक

Rakesh Kumar

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