शेयर बाजार ने मंगलवार को जिस तरह कारोबार किया, उसने सोमवार की छुट्टी के बाद बाजार खुलने का इंतजार कर रहे निवेशकों को राहत देने के बजाय चिंता में डाल दिया। सुबह की शुरुआत हालांकि कमजोर नहीं थी। बाजार खुलते समय सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में थे और शुरुआती कारोबार में तेजी भी दिखाई दी।
लेकिन कुछ ही घंटों में तस्वीर बदल गई।
सुबह की बढ़त धीरे-धीरे गायब हुई और दोपहर बाद बिकवाली तेज होती चली गई। कारोबार के आखिरी हिस्से में दबाव इतना बढ़ा कि सेंसेक्स करीब 778 अंक तक टूट गया। निफ्टी भी 23,200 के नीचे चला गया।
अंतिम आंकड़ों ने गिरावट की पूरी तस्वीर सामने रख दी।
सेंसेक्स 777.94 अंक यानी 1.04% गिरकर 74,003.82 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 1.19% टूटकर 23,118.60 पर पहुंच गया। Reuters के मुताबिक निफ्टी का यह करीब पांच महीने का सबसे निचला बंद स्तर रहा।
लेकिन सवाल यह है कि छुट्टी के बाद बाजार खुलते ही इतनी बड़ी बिकवाली क्यों शुरू हो गई?
सुबह बाजार हरे निशान में था, फिर अचानक क्या बदला?
15 सितंबर की सुबह बाजार की शुरुआत सकारात्मक संकेतों के साथ हुई थी। GIFT Nifty करीब 23,500 के ऊपर था और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 से ज्यादा अंक ऊपर चला गया था। निफ्टी भी 23,500 के आसपास कारोबार कर रहा था।
शुरुआती तेजी के पीछे IT शेयरों में खरीदारी और HDFC Bank में मजबूती प्रमुख वजह रही।
लेकिन दूसरी तरफ कुछ बड़े खतरे लगातार बाजार के सामने मौजूद थे।
कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई थी। अमेरिका में 10 साल की Treasury yield करीब 5% तक पहुंच गई थी और इसी सप्ताह Federal Reserve की बैठक होने वाली है।
इन तीनों चीजों ने बाजार में जोखिम की चिंता बढ़ा दी।
यही वजह रही कि शुरुआती तेजी ज्यादा देर टिक नहीं सकी।
सेंसेक्स 777 अंक टूटा, निफ्टी 23,119 पर बंद
कारोबार खत्म होने के बाद तस्वीर काफी कमजोर थी।
| इंडेक्स | बंद स्तर | गिरावट |
|---|---|---|
| Sensex | 74,003.82 | 777.94 अंक |
| Nifty 50 | 23,118.60 | 1.19% |
| Nifty Midcap 100 | — | करीब 2.1% |
| Nifty Smallcap 100 | — | करीब 2.4% |
Reuters के मुताबिक 16 में से 15 प्रमुख सेक्टर इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बड़ी बिकवाली हुई।
यानी गिरावट सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी तक सीमित नहीं थी। बाजार का बड़ा हिस्सा दबाव में रहा।
अगर आप पिछले कुछ समय से बाजार में जारी उतार-चढ़ाव को देख रहे हैं तो शेयर बाजार में गिरावट की पिछली रिपोर्ट से भी इसकी पृष्ठभूमि समझ सकते हैं।
कच्चा तेल बना बाजार का सबसे बड़ा सिरदर्द
मंगलवार की गिरावट में कच्चे तेल की कीमत का बड़ा योगदान रहा।
Brent crude करीब 107.8 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों में मध्य पूर्व में बढ़े तनाव और सऊदी अरब के ऊर्जा ढांचे से जुड़ी घटनाओं ने बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल कई स्तरों पर दबाव पैदा करता है।
सबसे पहले आयात बिल बढ़ता है। इसके बाद रुपये पर दबाव आ सकता है। महंगा तेल परिवहन और उत्पादन लागत को भी प्रभावित कर सकता है। अगर इसका असर महंगाई पर पड़ता है तो ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंता बढ़ सकती है।
यही कारण है कि जब Brent 100 डॉलर से ऊपर जाता है तो भारतीय शेयर बाजार के निवेशक इसे गंभीरता से देखते हैं।
अमेरिका में Fed की बैठक ने बढ़ाई चिंता
बाजार के सामने दूसरा बड़ा मुद्दा अमेरिकी Federal Reserve की आगामी बैठक है।
अमेरिकी महंगाई के हालिया आंकड़ों के बाद बाजार में यह उम्मीद मजबूत हुई है कि Fed ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। Reuters के मुताबिक बाजार में 25 बेसिस पॉइंट की दर बढ़ोतरी की संभावना काफी मजबूत हो गई है।
ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहता।
अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने पर दुनिया भर के निवेशकों के लिए डॉलर आधारित एसेट ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। इसका असर उभरते बाजारों से विदेशी निवेश की दिशा पर पड़ सकता है।
भारत में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली पहले से चिंता का विषय बनी हुई है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सितंबर में अब तक बड़ी मात्रा में भारतीय शेयरों से पैसा निकाला है।
डॉलर और रुपये की चाल भी बनी चिंता
महंगे तेल और अमेरिकी दरों की संभावना का असर भारतीय रुपये पर भी पड़ा है।
Reuters के मुताबिक रुपया पिछले सप्ताह एक फीसदी से ज्यादा कमजोर होकर करीब ₹95.55 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। हालांकि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर होने के कारण RBI के पास रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है।
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार हाल में 785 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच चुका है। इस पर हमने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की रिपोर्ट में भी विस्तार से जानकारी दी थी।
फिर भी शेयर बाजार के लिए मजबूत डॉलर और कमजोर रुपया हमेशा आरामदायक स्थिति नहीं माने जाते।
IT शेयरों ने दिखाई अलग कहानी
मंगलवार के बाजार की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जब ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में थे, तब IT शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
Nifty IT Index करीब 5% तक चढ़ा और इस सेक्टर में लगभग ₹1.13 लाख करोड़ की बाजार पूंजी जुड़ गई।
TCS और Infosys जैसे बड़े IT शेयरों में भी तेजी रही।
इसके पीछे अमेरिका में AI डेवलपमेंट की रफ्तार को लेकर चल रही नई चर्चा को माना जा रहा है। बाजार में यह धारणा बनी कि अगर AI को लेकर खर्च और विकास की रफ्तार कुछ धीमी होती है तो पारंपरिक IT सर्विस कंपनियों को अपेक्षाकृत फायदा मिल सकता है।
इसलिए मंगलवार को बाजार की गिरावट के बीच IT सेक्टर ने बाकी बाजार से बिल्कुल अलग प्रदर्शन किया।
HDFC Bank में भी खरीदारी
HDFC Bank भी मंगलवार के कारोबार में मजबूती दिखाने वाले बड़े शेयरों में रहा।
बैंक ने CEO पद के लिए दो उम्मीदवारों के नाम RBI को भेजे हैं। इसके बाद शेयर में शुरुआती कारोबार के दौरान करीब 3% तक तेजी देखी गई।
बाद में व्यापक बाजार में बिकवाली बढ़ने के बावजूद HDFC Bank ने बाजार को कुछ सहारा दिया।
यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि HDFC Bank का वजन प्रमुख इंडेक्स में काफी ज्यादा है। ऐसे बड़े शेयरों में खरीदारी होने पर सेंसेक्स और निफ्टी की गिरावट कुछ हद तक नियंत्रित हो सकती है।
Auto और Financial शेयरों पर ज्यादा दबाव
मंगलवार को सिर्फ एक-दो कंपनियों के शेयर नहीं टूटे।
Nifty Auto करीब 2% और Financials करीब 1.8% नीचे रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप में गिरावट इससे भी ज्यादा रही।
महंगे तेल का असर ऑटो और दूसरे oil-sensitive सेक्टरों पर पड़ने की चिंता भी रही।
दूसरी तरफ बढ़ती बॉन्ड यील्ड और संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी ने वित्तीय शेयरों पर दबाव बनाया।
इसका मतलब यह हुआ कि बाजार में बिकवाली काफी व्यापक रही।
निवेशकों के ₹10 लाख करोड़ का आंकड़ा क्यों चर्चा में है?
मंगलवार की तेज गिरावट के बाद बाजार पूंजीकरण में बड़ी कमी आई। कई बाजार रिपोर्टों में निवेशकों की संपत्ति में लगभग ₹10 लाख करोड़ तक की गिरावट की चर्चा हुई है।
हालांकि यह समझना जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि निवेशकों ने ₹10 लाख करोड़ नकद निकाल लिया। बाजार पूंजीकरण शेयरों की कीमत और कुल सूचीबद्ध शेयरों के आधार पर बदलता है। जब बड़ी संख्या में शेयरों की कीमत गिरती है तो कुल market value भी घट जाती है।
इसीलिए “₹10 लाख करोड़ डूबे” जैसी headline को बाजार मूल्य में कमी के अर्थ में समझना चाहिए।
क्या बाजार में अभी और गिरावट आ सकती है?
यह सवाल अब हर निवेशक के मन में है।
मंगलवार के बाद बाजार के सामने कुछ महत्वपूर्ण संकेत हैं।
सबसे पहले Nifty 23,100 के आसपास पहुंच चुका है। Reuters के मुताबिक मंगलवार का बंद स्तर 23,118.60 रहा, जो करीब पांच महीने का निचला स्तर है।
तकनीकी नजरिए से 23,100 के आसपास का क्षेत्र इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके नीचे निर्णायक कमजोरी आने पर बाजार में नई बिकवाली का दबाव बन सकता है।
दूसरी तरफ अगर बाजार इस स्तर को संभालता है और कच्चे तेल की कीमतों में राहत आती है तो recovery की कोशिश भी देखने को मिल सकती है।
Live Hindustan में तकनीकी विश्लेषकों ने भी Nifty के लिए 23,100 के आसपास के स्तर को महत्वपूर्ण बताया है और कच्चे तेल को निकट अवधि का प्रमुख market driver माना है।
आगे बाजार के लिए कौन-कौन से फैक्टर अहम होंगे?
अगले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा कई चीजों से तय होगी।
1. अमेरिकी Federal Reserve का फैसला
ब्याज दर में बढ़ोतरी और आगे के संकेत बाजार की दिशा बदल सकते हैं।
2. कच्चे तेल की कीमत
Brent अगर 100 डॉलर से ऊपर बना रहता है तो भारतीय बाजार पर दबाव जारी रह सकता है।
3. रुपये की चाल
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी बढ़ी तो आयातित महंगाई की चिंता बढ़ सकती है।
4. FII निवेश
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार के लिए बड़ा जोखिम बनी हुई है।
5. मिडकैप और स्मॉलकैप
इन शेयरों में बड़ी गिरावट जारी रहती है तो व्यापक बाजार का sentiment कमजोर रह सकता है।
6. IT सेक्टर
मंगलवार को IT ने बाजार के खिलाफ जाकर प्रदर्शन किया। अगर यह तेजी आगे भी बनी रहती है तो इंडेक्स को कुछ सहारा मिल सकता है।
क्या अभी शेयर खरीदना चाहिए?
मंगलवार की गिरावट के बाद सिर्फ इसलिए शेयर खरीदना कि बाजार 700-800 अंक गिर गया है, सही रणनीति नहीं मानी जा सकती।
हर कंपनी की स्थिति अलग होती है। बाजार गिरने पर मजबूत कंपनियों के शेयर भी नीचे आ सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर गिरा हुआ शेयर सस्ता हो गया।
अगर कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहा है तो कंपनी के earnings, debt, valuation और business outlook को देखकर फैसला लेना ज्यादा जरूरी है।
Intraday या short-term trading में जोखिम और ज्यादा होता है। ऐसे समय stop-loss और position sizing जैसे risk-management नियमों को नजरअंदाज करना नुकसान बढ़ा सकता है।
यह खबर निवेश की व्यक्तिगत सलाह नहीं है।
अब बाजार की नजर 23,100 पर
मंगलवार का कारोबार निवेशकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि सुबह बाजार ने तेजी दिखाई, लेकिन दिन खत्म होते-होते पूरा sentiment बदल गया।
सेंसेक्स 777.94 अंक गिरकर 74,003.82 पर बंद हुआ और निफ्टी 23,118.60 पर पहुंच गया।
एक तरफ महंगा कच्चा तेल, बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और Fed की दरों को लेकर चिंता है। दूसरी तरफ IT शेयरों और HDFC Bank जैसे कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी बाजार को पूरी तरह टूटने से रोकने की कोशिश कर रही है।
अब आने वाले कारोबारी सत्र में सबसे ज्यादा नजर Nifty के 23,100 के आसपास के स्तर, Brent crude की चाल और अमेरिकी Fed के फैसले पर रहेगी।
मंगलवार की गिरावट के बाद बाजार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 23,100 के आसपास खरीदारी लौटेगी या फिर बिकवाली का एक और दौर शुरू होगा?
फिलहाल बाजार का संकेत साफ है कि आने वाले दिन सामान्य नहीं रहने वाले हैं।