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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर, रूस को पछाड़ने की कहानी में क्या है?

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 785.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। एक सप्ताह में 44.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी के पीछे विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और बड़े डॉलर प्रवाह की अहम भूमिका रही।

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर, रूस को पछाड़ने की कहानी में क्या है

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर, रूस को पछाड़ने की कहानी में क्या है

पिछले कुछ समय से भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों में एक आंकड़ा लगातार ऊपर जा रहा था। विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव, रुपये की चाल और दुनिया भर में चल रही आर्थिक हलचल के बीच देश के रिजर्व को लेकर तस्वीर पहले जैसी नहीं थी। ऐसे में अचानक एक सप्ताह के आंकड़े ने पूरा ध्यान अपनी तरफ खींच लिया।

आरबीआई के ताजा आंकड़ों में इस बार बढ़ोतरी इतनी बड़ी है कि सामान्य साप्ताहिक बदलाव से इसकी तुलना करना मुश्किल है। पिछले सप्ताह जहां भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 740.803 अरब डॉलर था, वहीं अगली रिपोर्ट में यह आंकड़ा 785.706 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

यानी सिर्फ एक सप्ताह में करीब 44.9 अरब डॉलर का इजाफा।

लेकिन यहां असली सवाल केवल इतना नहीं है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर कैसे पहुंचा। सवाल यह भी है कि इस तेजी के पीछे पैसा कहां से आया, इसमें विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का कितना योगदान रहा, सोने के भंडार के साथ क्या हुआ और क्या सचमुच भारत अब विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में रूस से आगे निकल गया है?

इन सवालों के जवाब इस पूरे आंकड़े की असली तस्वीर सामने रखते हैं।

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एक सप्ताह में आया 44.9 अरब डॉलर का उछाल

रिजर्व बैंक के मुताबिक 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 44.903 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और कुल रिजर्व 785.706 अरब डॉलर हो गया। इससे पहले 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भी भंडार 11.475 अरब डॉलर बढ़ा था और 740.803 अरब डॉलर पर पहुंचा था।

इसका मतलब है कि दो लगातार सप्ताह में ही भारत के रिजर्व में करीब 56 अरब डॉलर की बढ़ोतरी दिखाई दी।

यही वजह है कि अब India forex reserves 785.7 billion और RBI forex reserves September 2026 जैसे शब्द अचानक चर्चा में हैं।

इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों से आया है।

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विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां बनीं सबसे बड़ा कारण

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को एक ही रकम मान लेना सही नहीं है। इसमें अलग-अलग हिस्से होते हैं। इनमें विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां यानी Foreign Currency Assets यानी FCA सबसे बड़ा हिस्सा हैं।

4 सितंबर वाले सप्ताह में FCA में 47.498 अरब डॉलर की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 648.168 अरब डॉलर हो गई।

यहीं से रिकॉर्ड बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह समझ आती है।

FCA में अमेरिकी डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी विदेशी मुद्राओं में रखी गई परिसंपत्तियां भी शामिल होती हैं। डॉलर में इनकी गणना करते समय संबंधित मुद्राओं के मूल्य में बदलाव का असर भी आंकड़े पर पड़ता है।

यानी 44.9 अरब डॉलर की पूरी बढ़ोतरी को केवल नए डॉलर आने के रूप में देखना ठीक नहीं होगा। इसमें विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों की कीमत और मुद्रा मूल्यांकन का असर भी शामिल होता है।

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सोने का भंडार बढ़ने के बजाय घटा

रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार की खबर के बीच एक दिलचस्प बात यह भी है कि इस दौरान भारत का गोल्ड रिजर्व बढ़ा नहीं, बल्कि घटा।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार 4 सितंबर वाले सप्ताह में सोने के भंडार का मूल्य 2.594 अरब डॉलर घटकर 113.816 अरब डॉलर रह गया।

इसका मतलब साफ है कि इस बार भारत के रिजर्व में आई बड़ी छलांग के पीछे मुख्य भूमिका सोने की नहीं थी।

अगर सोने में गिरावट के बावजूद कुल विदेशी मुद्रा भंडार करीब 45 अरब डॉलर बढ़ा है, तो इसका ध्यान फिर विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और देश में आए विदेशी मुद्रा प्रवाह की तरफ जाता है।

यही वह हिस्सा है जहां कहानी और दिलचस्प हो जाती है।

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आखिर इतना डॉलर भारत में आया कहां से?

जून 2026 में आरबीआई ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए कुछ विशेष उपाय किए थे। इनका मकसद बैंकों और दूसरी संस्थाओं के जरिए देश में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाना था।

इन उपायों के बाद विदेशी मुद्रा का प्रवाह काफी तेज हुआ।

रॉयटर्स के मुताबिक 5 जून से 31 अगस्त के बीच इन योजनाओं के तहत करीब 136.3 अरब डॉलर का प्रवाह हुआ। इसमें NRI deposits यानी अनिवासी भारतीयों की जमा राशि का हिस्सा लगभग 127 अरब डॉलर रहा।

यही आंकड़ा बताता है कि इस बार रिजर्व में तेजी के पीछे केवल सामान्य बाजार गतिविधियां नहीं थीं।

FCNR(B) यानी Foreign Currency Non-Resident Bank deposits ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई। इन खातों में NRI विदेशी मुद्रा में जमा कर सकते हैं और इस तरह बैंकों के जरिए देश में विदेशी मुद्रा उपलब्ध होती है।

आरबीआई की विशेष सुविधा को तय समय से पहले बंद किए जाने की खबर भी इसी मजबूत प्रवाह से जुड़ी है।

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भारत विदेशी मुद्रा भंडार में रूस से आगे निकला?

अब उस दावे पर आते हैं जिसने इस खबर को और बड़ा बना दिया है।

ताजा आंकड़े आने के बाद कई रिपोर्टों में कहा गया है कि भारत विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाले देशों की सूची में रूस से आगे निकलकर चौथे स्थान पर पहुंच गया है।

Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार Bloomberg के आंकड़ों के आधार पर भारत अब चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद चौथे स्थान पर है।

यह बदलाव इसलिए हुआ क्योंकि भारत का रिजर्व रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि तुलना में रूस का विदेशी मुद्रा भंडार इससे नीचे रहा।

इसलिए “भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रूस से आगे” इस खबर का एक महत्वपूर्ण search angle बन गया है।

हालांकि इसे पढ़ते समय यह समझना जरूरी है कि देशों की रैंकिंग अलग-अलग तारीखों के उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हो सकती है। इसलिए इसे स्थायी स्थिति मानने के बजाय मौजूदा उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर समझना बेहतर है।

RBI के आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार आंकड़ेReserve Bank of India के आंकड़े

भारत के पास अब कुल कितना विदेशी मुद्रा भंडार है?

4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह के लिए RBI के आंकड़े इस प्रकार हैं:

रिजर्व का हिस्सा राशि
Foreign Currency Assets 648.168 अरब डॉलर
Gold Reserves 113.816 अरब डॉलर
SDRs 18.806 अरब डॉलर
IMF Reserve Position 4.916 अरब डॉलर
कुल विदेशी मुद्रा भंडार 785.706 अरब डॉलर

ये आंकड़े RBI के उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं।

यानी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर केवल एक headline number नहीं है। इसके पीछे अलग-अलग assets का पूरा ढांचा है।

रिकॉर्ड बढ़ोतरी पर Reuters की रिपोर्टReuters की रिपोर्ट

क्या यह रुपये के लिए अच्छी खबर है?

विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा होना आम तौर पर किसी देश के लिए सुरक्षा कवच माना जाता है। जब वैश्विक बाजारों में अचानक दबाव आता है, तेल की कीमतें बढ़ती हैं या विदेशी पूंजी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव होता है, तब पर्याप्त रिजर्व केंद्रीय बैंक को बाजार में हस्तक्षेप करने की क्षमता देता है।

भारत जैसे देश के लिए इसका महत्व और बढ़ जाता है क्योंकि देश की बड़ी मात्रा में ऊर्जा और दूसरी वस्तुओं की खरीद विदेशी मुद्रा में होती है।

रिजर्व का मजबूत स्तर रुपये में अचानक होने वाली तेज गिरावट को संभालने के लिए RBI को ज्यादा गुंजाइश दे सकता है।

हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि ज्यादा रिजर्व होने से रुपया हमेशा मजबूत रहेगा। विदेशी मुद्रा बाजार पर कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी डॉलर की स्थिति, विदेशी निवेश, व्यापार घाटा और वैश्विक घटनाओं समेत कई चीजों का असर पड़ता है।

रॉयटर्स ने यह भी बताया है कि RBI पहले से ही रुपये को सहारा देने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करता रहा है।

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दस सप्ताह से लगातार बढ़ रहा है रिजर्व

इस रिकॉर्ड को केवल एक सप्ताह की कहानी मानना भी अधूरा होगा।

रॉयटर्स के अनुसार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार 10 सप्ताह बढ़ा है और इस अवधि में करीब 120 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है।

यही लगातार बढ़ोतरी इस आंकड़े को ज्यादा महत्वपूर्ण बनाती है।

हालांकि आगे यह रफ्तार कितनी बनी रहती है, यह देखना होगा। विदेशी मुद्रा प्रवाह स्थायी रूप से एक ही गति से नहीं चलता। RBI की नीतियां, बैंकिंग सिस्टम में डॉलर की मांग, NRI deposits और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियां आगे के आंकड़ों को प्रभावित कर सकती हैं।

कुछ विश्लेषकों ने यह भी संकेत दिया है कि headline reserves में हुई पूरी बढ़ोतरी को भविष्य की देनदारियों से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। रॉयटर्स के मुताबिक RBI के forward dollar sales और संबंधित देनदारियों का भी इस तस्वीर में महत्व है।

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए इसका क्या मतलब है?

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई मोर्चों पर अनिश्चितता से गुजर रही है।

एक मजबूत रिजर्व देश को बाहरी झटकों से निपटने के लिए ज्यादा गुंजाइश देता है। यह विदेशी निवेशकों के लिए भी देश की बाहरी वित्तीय स्थिति का एक महत्वपूर्ण संकेतक होता है।

भारत के लिए इसका एक और पहलू है। अगर विदेशी मुद्रा का प्रवाह मजबूत रहता है तो बैंकों और वित्तीय बाजार में डॉलर की उपलब्धता बेहतर रह सकती है।

लेकिन यहां सावधानी भी जरूरी है। विदेशी मुद्रा भंडार में हुई तेजी का एक बड़ा हिस्सा विशेष नीतिगत उपायों और विदेशी मुद्रा जमा से जुड़ा है। इसलिए आने वाले महीनों के आंकड़े यह बताएंगे कि यह तेजी कितनी टिकाऊ है।

आगे क्या देखना होगा?

अब बाजार की नजर अगले RBI forex reserves data पर रहेगी।

अगर विदेशी मुद्रा भंडार आगे भी मजबूत गति से बढ़ता रहा तो भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति और मजबूत दिखाई देगी। वहीं अगर विशेष प्रवाह कम होने के बाद वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ती है तो यह भी सामान्य स्थिति होगी।

फिलहाल इतना साफ है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर पर पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा आंकड़ा है। सिर्फ एक सप्ताह में 44.9 अरब डॉलर की बढ़ोतरी और दस सप्ताह की लगातार वृद्धि ने इसे सामान्य साप्ताहिक बदलाव से कहीं बड़ा बना दिया है।

और इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प बात शायद यही है कि रिकॉर्ड बनने के पीछे सोने का योगदान नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और विदेशी मुद्रा प्रवाह की बड़ी भूमिका रही।

आने वाले आंकड़े यह तय करेंगे कि 785.7 अरब डॉलर का यह रिकॉर्ड एक नई सामान्य स्थिति की शुरुआत है या विदेशी मुद्रा के असाधारण प्रवाह से बना एक बड़ा उछाल।

लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

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