आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडा की कंपनी को बेचने के प्रस्ताव के खिलाफ बैंक कर्मचारियों का विरोध अब औपचारिक रूप ले चुका है। आईडीबीआई बैंक भूख हड़ताल का ऐलान करते हुए अधिकारी-कर्मचारी संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने 2 और 3 नवंबर को देशभर में दो-दिवसीय राष्ट्रव्यापी भूख हड़ताल की घोषणा की है। हड़ताल का नोटिस बैंक प्रबंधन को औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत भेजा जा चुका है, और कहा गया है कि देश के सभी ब्रांचों और कार्यालयों में इसका पालन किया जाएगा।

कौन कर रहा है हड़ताल
हड़ताल का आह्वान ‘यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज’ ने किया है, जिसमें ऑल इंडिया आईडीबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन शामिल हैं। हड़ताल नोटिस पर संयोजक देवीदास तुलजापुरकर तथा संयुक्त संयोजक विट्ठल कोटेश्वर राव और रत्नाकर वांखड़े के हस्ताक्षर हैं।
आईडीबीआई बैंक भूख हड़ताल की मुख्य मांगें
फोरम ने केंद्र सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। सबसे बड़ी मांग है कि प्रस्तावित बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए और केंद्र एलआईसी से या खुले बाजार से कम से कम 6 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदकर बैंक में अपनी हिस्सेदारी न्यूनतम 51 प्रतिशत बनाए रखे। कर्मचारियों का कहना है कि यह दिसंबर 2003 में संसद के दोनों सदनों में दिए गए आश्वासन के अनुरूप होगा, जिसमें बैंक का बहुमत स्वामित्व सरकार के पास रखने की बात कही गई थी।
मुख्य मांगें एक नजर में:
- बिक्री पर रोक; एलआईसी या बाजार से 6% हिस्सेदारी लेकर सरकार की हिस्सेदारी कम से कम 51% बनाए रखी जाए
- सेवा शर्तों, कल्याण उपायों, पेंशन लाभों और आरक्षण नीति की लिखित वैधानिक गारंटी
- सभी कर्मचारियों के रोजगार का सार्वजनिक क्षेत्र का चरित्र बना रहे
- उद्योग-स्तर के वेतन संशोधन और पेंशन लाभ जारी रहें
- इच्छुक कर्मचारियों को सेवा, वेतनमान, वरिष्ठता और सेवानिवृत्ति लाभ सुरक्षित रखते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में स्थानांतरण का विकल्प
- आउटसोर्स और ठेके पर काम करने वाले कर्मियों का समायोजन
Fairfax डील का पूरा हिसाब-किताब
आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 14 अक्टूबर 2026 को आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी 10955230 कनाडा इंक (फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की मूल कंपनी) को बेचने की मंजूरी दी थी। सौदा करीब ₹52,878 करोड़ का है, जिसमें ₹81 प्रति शेयर के भाव से इक्विटी बेची जाएगी। इसमें सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत और एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। बिक्री के बाद सरकार के पास 15 प्रतिशत और एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रह जाएगी। बैंकिंग सेक्टर की इसी तरह की बड़ी खबरों में इस महीने HDFC Bank ने Q2 में ₹19,510 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया था, जबकि यस बैंक एटी1 बॉन्ड राइट-ऑफ को सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी करार दिया था।
सरकार का पक्ष: कर्मचारी हित सुरक्षित रहेंगे
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में कहा है कि शेयर खरीद समझौते में मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों और पेंशन लाभों की सुरक्षा के प्रावधान शामिल किए गए हैं। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने भी कहा है कि सेवा शर्तें बनी रहेंगी और पेंशन लाभ एक समर्पित पेंशन फंड के जरिए सुरक्षित किए जाएंगे। हालांकि कर्मचारी फोरम का कहना है कि प्रक्रिया के दौरान कर्मचारी प्रतिनिधियों से सलाह नहीं ली गई, और सौदे के मूल्यांकन की पारदर्शिता पर भी सवाल बने हुए हैं। टेक महिंद्रा के Q2 नतीजों की तरह ही यह डील भी निवेशकों और कर्मचारियों दोनों के लिए अहम है।
आगे क्या: अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
हड़ताल नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा — जिसमें बिना किसी और नोटिस के अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान भी शामिल हो सकता है। फोरम का कहना है कि उसे उम्मीद है कि बैंक प्रबंधन और केंद्र विवाद के रचनात्मक समाधान के लिए आगे आएंगे। किसान, छोटे कर्जदार और जमाकर्ताओं के हित का हवाला देते हुए यूनियन ने बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग दोहराई है। (स्रोत: द हिंदू बिजनेसलाइन) (सरकार का पक्ष)

