मुख्य सामग्री पर जाएँ
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
पहली खबर
पहलीखबर
ताजा हिंदी समाचार
ब्रेकिंग न्यूज़
पेट्रोल-डीजल पर विंडफॉल टैक्स बदला: पेट्रोल एक्सपोर्ट ड्यूटी 5 गुना बढ़कर ₹2.50, डीजल पर ₹7.50 की राहत — क्या महंगा होगा तेल?  |  INS Samarthak: कारवार में नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ पहला स्वदेशी मल्टी-पर्पज वेसल, 75% से ज्यादा भारतीय तकनीक  |  RBI से मंजूरी मिलने के बाद नजदीक आया PFC-REC विलय: बनेगा ₹11 लाख करोड़ का पावर फाइनेंस दिग्गज  |  Tech Mahindra के Q2 नतीजों से बाजार में धूम: 33% बढ़ा मुनाफा, 1:1 बोनस शेयर और ₹15 डिविडेंड का तोहफा  |  महाराष्ट्र में खुले मसालों की बिक्री पर बैन: FDA का बड़ा फैसला, अब सिर्फ सीलबंद पैकेट में मिलेंगे हल्दी-मिर्ची
Home / देश-दुनिया

INS Samarthak: कारवार में नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ पहला स्वदेशी मल्टी-पर्पज वेसल, 75% से ज्यादा भारतीय तकनीक

16 अक्टूबर 2026 को उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी में INS Samarthak भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ। 75% से ज्यादा स्वदेशी तकनीक वाले इस पहले मल्टी-पर्पज वेसल को लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने अपने कट्टुपल्ली शिपयार्ड में बनाया है।

INS Samarthak — प्रतीकात्मक चित्र

INS Samarthak भारतीय नौसेना मल्टी-पर्पज वेसल (प्रतीकात्मक फोटो)

INS Samarthak: कर्नाटक के कारवार स्थित आईएनएस कदंबा नौसेना बेस पर शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की सुबह कुछ अलग ही रौनक थी। परेड ग्राउंड पर नौसैनिकों की पंक्तियां, बैंड की धुन और समंदर की ओर से आती ठंडी हवा — इसी माहौल के बीच उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने वह नौसेना ध्वज फहराया, जो भारतीय नौसेना के बेड़े में एक नए योद्धा के आगमन का प्रतीक था। नाम है — INS Samarthak, भारतीय नौसेना का पहला स्वदेशी मल्टी-पर्पज वेसल (MPV), जो अब नौसेना का हिस्सा बन चुका है।

समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, कर्नाटक के मंत्री संतोष लाड और नौसेना के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। जैसे ही औपचारिक घोषणा हुई, जहाज के मस्तूल पर नौसेना का नया ध्वज लहराने लगा और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ यह इतिहास बन गया। इस जहाज का क्रेस्ट भी खास है — लहरों से उभरता भारतीय हाथी, जो ताकत, बुद्धिमत्ता और फुर्ती का प्रतीक है। इसका आदर्श वाक्य है “विजयार्थम् एकनिष्ठता”, जिसका अर्थ है “विजय ही हमारा एकमात्र लक्ष्य है”।

INS Samarthak — प्रतीकात्मक चित्र
INS Samarthak भारतीय नौसेना मल्टी-पर्पज वेसल (प्रतीकात्मक फोटो)

INS Samarthak क्या है? जानिए इसकी कहानी

INS Samarthak समार्थक-क्लास का पहला मल्टी-पर्पज वेसल है, जिसे लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने चेन्नई के पास अपने कट्टुपल्ली शिपयार्ड में डिजाइन और निर्माण किया है। यह ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी सफलता है — नौसेना प्रमुख के मुताबिक यह पहला बड़ा युद्धपोत है, जिसका ठेका किसी निजी भारतीय शिपयार्ड को दिया गया और उसी ने इसे बनाया। रक्षा मंत्रालय ने 25 मार्च 2022 को L&T के साथ 887 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत दो ऐसे जहाज बनने हैं। इस जहाज की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्वदेशी सामग्री है — 75% से ज्यादा। इसे पूरी तरह L&T के वॉरशिप डिजाइन सेंटर में इन-हाउस डिजाइन, इंजीनियर और निर्मित किया गया है। साथ ही देशभर की रक्षा कंपनियों और एमएसएमई ने इसके निर्माण में योगदान दिया है, जिससे यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बन गया है।

INS Samarthak की ताकत: लंबाई से लेकर रेंज तक

आकार की बात करें तो INS Samarthak करीब 107 मीटर लंबा और 3,750 टन वजनी है। इसकी चौड़ाई करीब 18.6 मीटर है, अधिकतम गति 15 नॉट है और यह एक बार में करीब 4,500 नॉटिकल मील की दूरी तय कर सकता है। जहाज पर 116 नौसैनिकों का दल तैनात रहेगा, जिनमें 8 अधिकारी शामिल हैं। लेकिन असली कहानी इसकी बहुमुखी भूमिकाओं में छिपी है। यह जहाज समुद्री निगरानी और गश्त, लो-इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशन, हथियारों और सेंसरों के परीक्षण, मानव-रहित और स्वायत्त सिस्टमों (समुद्री व हवाई) के लिए मदरशिप, लक्ष्य तैनाती और रिकवरी, टोइंग और सैल्वेज, समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया और आपदा राहत (HADR) जैसे काम संभालेगा। जरूरत पड़ने पर इसे सीमित क्षमता वाले अस्पताल जहाज में भी बदला जा सकता है। तकनीकी साज-सज्जा की बात करें तो जहाज में गन, एंटी-सबमरीन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर, डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम के साथ-साथ इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट और ऑटोमैटिक पावर मैनेजमेंट सिस्टम लगे हैं, जो इसे आधुनिक समुद्री चुनौतियों के लिए तैयार बनाते हैं। आत्मनिर्भरता की यह कहानी सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं है — टेक महिंद्रा के हालिया तिमाही नतीजे बताते हैं कि भारतीय कंपनियां हर क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।

निजी शिपयार्ड का मील का पत्थर: क्यों है यह खास?

भारत में अब तक बड़े युद्धपोत सरकारी शिपयार्डों में ही बनते थे। L&T जैसे निजी शिपयार्ड का इतने बड़े और जटिल युद्धपोत को डिजाइन से लेकर निर्माण तक पूरा करना यह साबित करता है कि भारतीय निजी उद्योग अब रक्षा निर्माण में भी परिपक्व हो चुका है। इससे न सिर्फ रोजगार और तकनीकी कौशल बढ़ेगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी इकोसिस्टम को भी बल मिलेगा।

अब आगे क्या? INS Utkarsh की बारी

जैसा कि बताया गया, 887 करोड़ रुपये के अनुबंध के तहत दो जहाज बनने हैं। दूसरा जहाज INS Utkarsh फिलहाल समुद्री परीक्षणों के दौर में है और इसका निर्माण भी जोरों पर है। इसके नौसेना में शामिल होने के बाद इस क्लास की क्षमता दोगुनी हो जाएगी, और भारतीय नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी, राहत और परीक्षण अभियानों के लिए और अधिक लचीलापन मिलेगा। कुल मिलाकर, INS Samarthak का बेड़े में शामिल होना सिर्फ एक जहाज का आगमन नहीं है — यह उस भारत की झलक है, जो अपने युद्धपोत खुद डिजाइन करता है, खुद बनाता है और अपने समंदरों की रक्षा खुद करता है।

स्रोत: The Hindu BusinessLine, The Economic Times

लेखक

Rakesh Kumar

नमस्कार, मैं राकेश कुमार हूँ। PAHALI KHABAR के माध्यम से मैं आपके लिए ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, खेल और अन्य महत्वपूर्ण खबरें लेकर आता हूँ। मेरा उद्देश्य है कि आपको हर खबर सरल भाषा में, सही तथ्यों के साथ और समय पर मिले।

और खबरें पढ़ें ›